कल का शुभ समय
कल के पंचांग के आधार पर शुभ, ठीक और अशुभ समय देखें। समय स्थान के अनुसार बदलते हैं।
कल का शुभ समय सारांश
कल का शुभ समय:
- 12:19am–1:43am — चौघड़िया शुभ
- 6:02am–7:08am — चौघड़िया अमृत
- 9:10am–10:43am — चौघड़िया शुभ
- 4:05pm–5:10pm — चौघड़िया लाभ
कल का ठीक समय:
- 4:36am–6:01am — चौघड़िया चर
- 1:53pm–3:13pm — चौघड़िया चर
- 5:11pm–10:52pm — पुनर्वसु, द्वादशी
कल का अशुभ समय:
- 12:00am–12:18am — चौघड़िया काल
- 1:44am–4:35am — चौघड़िया रोग
- 7:09am–9:09am — वर्ज्यम्
- 10:44am–1:52pm — दुर्मुहूर्त
- 3:14pm–4:04pm — दुर्मुहूर्त
- 10:53pm–11:59pm — चौघड़िया काल
कल का पंचांग विवरण
तिथि: एकादशी 5:10pm तक, फिर द्वादशी
नक्षत्र: पुनर्वसु 6:19pm तक, फिर पुष्य
सूर्योदय 6:02am | सूर्यास्त 6:36pm
दुर्मुहूर्त: 12:44pm– 1:34pm, 3:14pm– 4:04pm
वर्ज्यम्: 7:09am– 8:37am
अमृत काल: 4:05pm– 5:33pm
राहु काल: 7:36am– 9:09am
अधिक पंचांग विवरण
योग:
व्यतीपात 6:47am तक
वरीयान 6:47am से
करण:
बव 6:24am तक
बालव 5:11pm तक
कौलव 5:11pm से
चौघड़िया:
(सूर्योदय 6:02am, सूर्यास्त 6:36pm के आधार पर)
अमृत 6:02am- 7:36am
काल 7:36am- 9:10am
शुभ 9:10am- 10:44am
रोग 10:44am- 12:19pm
उद्वेग 12:19pm- 1:53pm
चर 1:53pm- 3:27pm
लाभ 3:27pm- 5:01pm
अमृत 5:01pm- 6:36pm
चर 6:36pm- 8:01pm
लाभ 8:01pm- 9:27pm
अमृत 9:27pm- 10:53pm
काल 10:53pm- 12:19am
शुभ 12:19am- 1:44am
रोग 1:44am- 3:10am
उद्वेग 3:10am- 4:36am
चर 4:36am- 6:02am
कल का शुभ समय कैसे निर्धारित होता है
इस पृष्ठ का शुभ / ठीक / अशुभ समय आपके स्थान के पंचांग पर आधारित है। सूर्योदय और सूर्यास्त से दिन की समय-सीमा निर्धारित होती है। इस समय-सीमा के भीतर तिथि, नक्षत्र, दुर्मुहूर्त, वर्ज्यम् और चौघड़िया के प्रभाव का प्रत्येक मिनट के लिए आकलन किया जाता है। अधिक बल वाले अशुभ कारक (दुर्मुहूर्त या वर्ज्यम्) एक साथ आने पर उन्हीं को प्राथमिकता मिलती है। जन्म नक्षत्र उपलब्ध हो तो परिणाम और व्यक्तिगत हो सकते हैं।
- दुर्मुहूर्त की गणना कैसे होती है?
- स्थानीय सूर्योदय→सूर्यास्त (दिन की लंबाई) लेकर, सप्ताह के दिन के अनुसार एक या दो दुर्मुहूर्त अवधियाँ उस दिन के निश्चित अंशों पर रखी जाती हैं (प्रत्येक लगभग दिन-लंबाई का 0.8/12; शनिवार सूर्योदय से 1.6/12)। वे मिनट हमेशा अशुभ (लाल) माने जाते हैं।
- वर्ज्यम् की गणना कैसे होती है?
- वर्ज्यम् वर्तमान नक्षत्र की पूरी अवधि से जुड़ा है। प्रत्येक नक्षत्र के लिए पारंपरिक आरंभ अंश (उस अवधि का अंश) और उसी अवधि की 1.6/24 लंबाई का उपयोग होता है। उस दिन के भीतर पड़ने वाला समय अशुभ (लाल) माना जाता है।
- अमृत काल की गणना कैसे होती है?
- अमृत काल अशुभ वर्ज्यम्/वर्ग्यम् अवधि जैसी ही नक्षत्र-अवधि विधि उपयोग करता है; प्रति-नक्षत्र आरंभ-अंश तालिका अलग है, लंबाई वही 1.6/24। यह शुभ अंतराल के रूप में दिखता है; अकेले यह कुल शुभ/ठीक/अशुभ रंग नहीं बदलता।
- राहु काल की गणना कैसे होती है?
- राहु काल स्थानीय सूर्योदय→सूर्यास्त को 8 बराबर भागों में बाँटता है। प्रत्येक सप्ताह-दिन एक भाग चुनता है (रवि 8वाँ, सोम 2रा, मंगल 7वाँ, बुध 5वाँ, गुरु 6वाँ, शुक्र 4था, शनि 3रा)। यह इस परंपरा के लिए दिखाया जाता है। उपयोगकर्ता की व्यक्तिगत गणना में शामिल होने पर ही शुभ / ठीक / अशुभ परिणाम पर प्रभाव पड़ता है।
- चौघड़िया की गणना कैसे होती है?
- दिन (सूर्योदय→सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त→अगला सूर्योदय) प्रत्येक को 8 बराबर खण्ड में बाँटा जाता है। वार के अनुसार प्रत्येक खण्ड का नाम निर्धारित होता है। चौघड़िया को गणना में शामिल करने पर अमृत, शुभ और लाभ को शुभ; चर को ठीक; तथा रोग, काल और उद्वेग को अशुभ माना जाता है।
समय मार्गदर्शन परिणामों की गारंटी नहीं देता। इसे पारंपरिक पंचांग मार्गदर्शन के रूप में उपयोग करें।